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संत नामदेव की काकड आरती: मूल पाठ और अर्थ
आरती · 6 पद · मूल भाषा: मराठी
संत नामदेव की काकड आरती के बारे में
पंढरपुर के विठ्ठल की भोर की (काकड) आरती का अभंग, जिसकी अंतिम पंक्ति में संत नामदेव का नाम "नामा" आता है। भक्त सबको जल्दी उठकर मंदिर चलने, मनुष्य-जन्म का लाभ उठाने और ढोल-नगाड़ों के बीच हो रही विठ्ठल की काकड आरती देखने को बुलाता है।
पाठ: संत नामदेव (अंतिम पंक्ति में "नामा") (13th–14th century (d. 1350))
अर्थ और सार इस संग्रह के लिए उद्धृत संस्करण से लिखे गए संपादकीय हैं।
मूल पाठ और अर्थ
चरण १
उठोनिया प्रातःकाळीं । वेगें जाऊ राउळासी । जळतिल पातकांच्या राशी । काकडआरती देखिल्या
भोर में उठकर जल्दी मंदिर चलें; काकड आरती के दर्शन से पापों के ढेर जल जाएँगे।
स्रोत: Nityanemavali (comp. R. D. Ranade), 12th ed., Academy of Comparative Philosophy and Religion, Belgaum, 1987, p. 4 (PDF p. 40), Marathi Wikisource, revision 224155, Kakad aarti no. 3, lines 1-2 (book p. 4)
चरण २
उठा उठा हो साधुजन । साधा आपुलालें हित । गेला गेला नरदेह | मग कैंचा भगवंत
उठो, उठो, हे साधुजन, अपना-अपना हित साध लो। यह मनुष्य-देह चली गई, तो फिर भगवान कहाँ मिलेंगे?
स्रोत: Nityanemavali (comp. R. D. Ranade), 12th ed., Academy of Comparative Philosophy and Religion, Belgaum, 1987, p. 4 (PDF p. 40), Marathi Wikisource, revision 224155, Kakad aarti no. 3, lines 3-4 (book p. 4)
चरण ३
उठोनिया पहाटे । विठोबा पाहूं बा नीट | चरण तयाचे अमोलिक | अवलोकूं दृष्टीं या
भोर में उठकर विठोबा के अच्छे से दर्शन करें; उनके अनमोल चरणों को इन आँखों से निहारें।
स्रोत: Nityanemavali (comp. R. D. Ranade), 12th ed., Academy of Comparative Philosophy and Religion, Belgaum, 1987, p. 4 (PDF p. 40), Marathi Wikisource, revision 224155, Kakad aarti no. 3, lines 5-6 (book p. 4)
चरण ४
जागे करा रुक्मिणीवरा । देव निजले निजमंदिरां । वेगीं निंबलोण करा | दृष्ट होईल तयासी
रुक्मिणी के पति को जगाओ; भगवान अपने मंदिर में सोए हैं। जल्दी से निंबलोण (नज़र उतारने की रीति) करो, कहीं उन्हें नज़र न लग जाए।
स्रोत: Nityanemavali (comp. R. D. Ranade), 12th ed., Academy of Comparative Philosophy and Religion, Belgaum, 1987, p. 4 (PDF p. 40), Marathi Wikisource, revision 224155, Kakad aarti no. 3, lines 7-8 (book p. 4)
चरण ५
ढोल दमामें गर्जतीं । पुढें वाजंत्री वाजती । काकडआरती होते। पांडुरंगरायाची
ढोल और नगाड़े गरज रहे हैं, आगे बाजे बज रहे हैं; राजा पांडुरंग की काकड आरती हो रही है।
स्रोत: Nityanemavali (comp. R. D. Ranade), 12th ed., Academy of Comparative Philosophy and Religion, Belgaum, 1987, p. 4 (PDF p. 40), Marathi Wikisource, revision 224155, Kakad aarti no. 3, lines 9-10 (book p. 4)
चरण ६
सिंहशंखनादभेरो । गजर होतो महाद्वारीं । केशवराज विटेवरी। नामा चरणीं वंदितो
सिंह-गर्जना जैसे शंख और भेरी के नाद से महाद्वार पर जयघोष हो रहा है। ईंट पर खड़े केशवराज (विठ्ठल) के चरणों में नामा वंदना करता है।
स्रोत: Nityanemavali (comp. R. D. Ranade), 12th ed., Academy of Comparative Philosophy and Religion, Belgaum, 1987, p. 4 (PDF p. 40), Marathi Wikisource, revision 224155, Kakad aarti no. 3, lines 11-12 (book p. 4)
स्रोत और लाइसेंस
- Nityanemavali (comp. R. D. Ranade), 12th ed., Academy of Comparative Philosophy and Religion, Belgaum, 1987, p. 4 (PDF p. 40), Marathi Wikisource, revision 224155. CC BY-SA 4.0 (edition relicensed by its publisher, Wikimedia VRT ticket 2023060210002841; Marathi Wikisource transcription)
पाठ "नित्यनेमावली" (संकलक गुरुदेव रा. द. रानडे; बारहवीं आवृत्ति, १९८७, अकॅडेमी ऑफ कंपेरेटिव्ह फिलॉसॉफी ॲन्ड रिलिजन, बेळगाव) के मराठी विकिस्रोत प्रतिलेखन से अक्षरशः लिया गया है; इस पुस्तक को प्रकाशक ने CC BY-SA 4.0 के अंतर्गत खुला किया है। छपी हुई वर्तनी ज्यों-की-त्यों है। यह पुस्तक की काकड आरती क्रमांक ३ है (पृ. ४), जो पहली आवृत्ति (१९११) से काकड आरती में है। छपे पाठ में चरण-क्रमांक नहीं हैं, इसलिए यहाँ दो-दो पंक्तियों के छह चरण क्रम से गिने गए हैं। अंतिम चरण का "भेरो" संभवतः "भेरी" (नगाड़ा) है। IAST लिप्यंतरण एक नियत नियम से बनाया गया है और मराठी उच्चारण का मार्गदर्शक नहीं है।