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संकष्टी चतुर्थी: अर्थ, विधि और मूल पाठ
व्रत · 2 पद · मूल भाषा: संस्कृत
संकष्टी चतुर्थी के बारे में
संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को गणेश जी का व्रत है। गणेश पुराण के अनुसार व्रत चन्द्रोदय तक रखा जाता है और चन्द्रोदय पर तिथि, गजानन और चन्द्रमा को मंत्र सहित अर्घ्य दिया जाता है।
पाठ: गणेश पुराण (उपासना खण्ड, अध्याय ५९) (Puranic)
अर्थ और सार इस संग्रह के लिए उद्धृत संस्करण से लिखे गए संपादकीय हैं।
व्यावहारिक मार्गदर्शन
उद्देश्य
- कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को गणेश जी का संकष्ट-चतुर्थी व्रत; स्रोत की कथा में यह व्रत पाप से मुक्ति का उपाय बताया गया है। स्रोत: Ganesha Purana, Upasana Khanda ch. 59 (page "adhyayas 56-60"), Sanskrit Wikisource, revision 315600, Upasana Khanda 59.13-14, 59.19
लाभ
- एक वर्ष तक व्रत करने से सब पाप नष्ट होते हैं, उत्तम पुत्र होता है, और जो भी कामना करे वह पूरी होती है। स्रोत: Ganesha Purana, Upasana Khanda ch. 59 (page "adhyayas 56-60"), Sanskrit Wikisource, revision 315600, Upasana Khanda 59.34
- सब संकट नष्ट होते हैं और शत्रु-सेना का भय नहीं रहता। स्रोत: Ganesha Purana, Upasana Khanda ch. 59 (page "adhyayas 56-60"), Sanskrit Wikisource, revision 315600, Upasana Khanda 59.35
- स्रोत कहता है कि अंधा, गूँगा, जड़ या लँगड़ा भी इच्छित फल पाता है, और पत्नी, पुत्र, धन और राज्य मिलते हैं। स्रोत: Ganesha Purana, Upasana Khanda ch. 59 (page "adhyayas 56-60"), Sanskrit Wikisource, revision 315600, Upasana Khanda 59.36-37
विधि
- वर्ष-भर का व्रत आरम्भ करने के लिए स्रोत माघ कृष्ण चतुर्थी, जब वह मंगलवार को पड़े, और शुभ मुहूर्त बताता है। स्रोत: Ganesha Purana, Upasana Khanda ch. 59 (page "adhyayas 56-60"), Sanskrit Wikisource, revision 315600, Upasana Khanda 59.21-22
- दाँत साफ़ करके स्नान करें (श्लोक में "इक्कीस स्नान" कहा गया है), नित्य-कर्म करें, फिर मंत्र-जप करें। स्रोत: Ganesha Purana, Upasana Khanda ch. 59 (page "adhyayas 56-60"), Sanskrit Wikisource, revision 315600, Upasana Khanda 59.22-23
- चन्द्रोदय तक निराहार और मौन रहें। स्रोत: Ganesha Purana, Upasana Khanda ch. 59 (page "adhyayas 56-60"), Sanskrit Wikisource, revision 315600, Upasana Khanda 59.23, 59.36
- दिन ढलने पर तिल और आँवले के लेप से स्नान करें; एकाक्षर, षडक्षर या वैदिक गणेश-मंत्र जपें और स्थिर मन से गजानन का ध्यान करें। स्रोत: Ganesha Purana, Upasana Khanda ch. 59 (page "adhyayas 56-60"), Sanskrit Wikisource, revision 315600, Upasana Khanda 59.25-26
- सोलह उपचारों से गणेश जी की पूजा करें: मोदक, लड्डू, खीर आदि नैवेद्य, तरह-तरह के फल, सुपारी-पान, दक्षिणा, इक्कीस दूर्वा, दीपक और फूल अर्पित करें। स्रोत: Ganesha Purana, Upasana Khanda ch. 59 (page "adhyayas 56-60"), Sanskrit Wikisource, revision 315600, Upasana Khanda 59.27-29
- चन्द्रोदय होने पर मंत्र सहित अर्घ्य दें: पहले तिथि को, फिर गजानन को, और फिर चन्द्रमा को। स्रोत: Ganesha Purana, Upasana Khanda ch. 59 (page "adhyayas 56-60"), Sanskrit Wikisource, revision 315600, Upasana Khanda 59.30
- पूजा अर्पित कर नमस्कार और क्षमा-प्रार्थना करें; सामर्थ्य के अनुसार इक्कीस (या दस-बारह) ब्राह्मणों को भोजन कराएँ और दक्षिणा दें। स्रोत: Ganesha Purana, Upasana Khanda ch. 59 (page "adhyayas 56-60"), Sanskrit Wikisource, revision 315600, Upasana Khanda 59.31-32
- व्रत-कथा सुनकर मौन होकर स्वयं भोजन करें, और शेष रात भजन-वाद्य के साथ बिताएँ। स्रोत: Ganesha Purana, Upasana Khanda ch. 59 (page "adhyayas 56-60"), Sanskrit Wikisource, revision 315600, Upasana Khanda 59.32-33
ध्यान रखें
- स्रोत में यह व्रत एक वर्ष तक हर कृष्ण चतुर्थी को करने का विधान है। स्रोत: Ganesha Purana, Upasana Khanda ch. 59 (page "adhyayas 56-60"), Sanskrit Wikisource, revision 315600, Upasana Khanda 59.33
- वर्ष-भर के लिए स्रोत हर महीने का अलग आहार बताता है: श्रावण में सात लड्डू, भाद्रपद में दही, आश्विन में उपवास, कार्तिक में दूध, मार्गशीर्ष में निराहार, पौष में गोमूत्र, माघ में तिल, फाल्गुन में घी-शक्कर, चैत्र में पंचगव्य, वैशाख में शतपत्रिका, ज्येष्ठ में घी, आषाढ़ में मधु। स्रोत: Ganesha Purana, Upasana Khanda ch. 59 (page "adhyayas 56-60"), Sanskrit Wikisource, revision 315600, Upasana Khanda 59.37-40
- चन्द्रोदय का समय हर स्थान पर अलग होता है; अपने शहर का चन्द्रोदय-समय पंचांग में देखें। (सामान्य प्रचलन)
- जिस दिन चन्द्रोदय के समय कृष्ण चतुर्थी हो, प्रायः उसी दिन संकष्टी मनाई जाती है। मंगलवार को पड़ने वाली संकष्टी को "अंगारकी" कहा जाता है। (सामान्य प्रचलन)
- बादल होने पर भी बहुत से लोग पंचांग के चन्द्रोदय-समय पर अर्घ्य देकर व्रत खोलते हैं। (सामान्य प्रचलन)
- उपवास से पहले अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। गर्भवती, बीमार, मधुमेह के रोगी, बुज़ुर्ग या नियमित दवा लेने वाले लोग डॉक्टर की सलाह से ही कठोर या निर्जल उपवास करें; ऐसे लोग प्रायः फलाहार या एक समय भोजन जैसा हल्का नियम अपनाते हैं। (सामान्य प्रचलन)
क्या न करें
- दूसरों की निंदा न करें। स्रोत: Ganesha Purana, Upasana Khanda ch. 59 (page "adhyayas 56-60"), Sanskrit Wikisource, revision 315600, Upasana Khanda 59.23
- बुरे कर्म, पान (ताम्बूल), जल-पान, दूसरों का अहित और चुगली से बचें। स्रोत: Ganesha Purana, Upasana Khanda ch. 59 (page "adhyayas 56-60"), Sanskrit Wikisource, revision 315600, Upasana Khanda 59.24
स्रोत वाले बिंदु उद्धृत श्लोकों का सरल भाषा में सार हैं। "सामान्य प्रचलन" वाले बिंदु इस संग्रह के लिए लिखी गई संपादकीय टिप्पणियाँ हैं।
मूल पाठ और अर्थ
गणेश पुराण १.५९.३०
चन्द्रोदयेऽर्घ्यदानेन तिथये मन्त्रपूर्वकम् । गजाननाय पश्चात्तु चन्द्राय च ततः परम् ॥१.५९.३०॥
चन्द्रोदय होने पर मंत्रपूर्वक अर्घ्य दे: पहले तिथि को, फिर गजानन को, और उसके बाद चन्द्रमा को।
स्रोत: Ganesha Purana, Upasana Khanda ch. 59 (page "adhyayas 56-60"), Sanskrit Wikisource, revision 315600, Upasana Khanda 59.30
गणेश पुराण १.५९.३६
आचन्द्रोदयपर्यन्तं व्रतमेतत्समाचरेत् । अन्धो मूको जडः पंगुस्तदीप्सितमवाप्नुयात् ॥३६॥
चन्द्रोदय होने तक यह व्रत करे। (ऐसा करने से) अंधा, गूँगा, जड़ या लँगड़ा व्यक्ति भी अपना इच्छित फल पाता है।
स्रोत: Ganesha Purana, Upasana Khanda ch. 59 (page "adhyayas 56-60"), Sanskrit Wikisource, revision 315600, Upasana Khanda 59.36
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- संकष्टी चतुर्थी का उद्देश्य क्या है?
- कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को गणेश जी का संकष्ट-चतुर्थी व्रत; स्रोत की कथा में यह व्रत पाप से मुक्ति का उपाय बताया गया है।
- संकष्टी चतुर्थी कैसे करें?
- 1. वर्ष-भर का व्रत आरम्भ करने के लिए स्रोत माघ कृष्ण चतुर्थी, जब वह मंगलवार को पड़े, और शुभ मुहूर्त बताता है। 2. दाँत साफ़ करके स्नान करें (श्लोक में "इक्कीस स्नान" कहा गया है), नित्य-कर्म करें, फिर मंत्र-जप करें। 3. चन्द्रोदय तक निराहार और मौन रहें। 4. दिन ढलने पर तिल और आँवले के लेप से स्नान करें; एकाक्षर, षडक्षर या वैदिक गणेश-मंत्र जपें और स्थिर मन से गजानन का ध्यान करें। 5. सोलह उपचारों से गणेश जी की पूजा करें: मोदक, लड्डू, खीर आदि नैवेद्य, तरह-तरह के फल, सुपारी-पान, दक्षिणा, इक्कीस दूर्वा, दीपक और फूल अर्पित करें। 6. चन्द्रोदय होने पर मंत्र सहित अर्घ्य दें: पहले तिथि को, फिर गजानन को, और फिर चन्द्रमा को। 7. पूजा अर्पित कर नमस्कार और क्षमा-प्रार्थना करें; सामर्थ्य के अनुसार इक्कीस (या दस-बारह) ब्राह्मणों को भोजन कराएँ और दक्षिणा दें। 8. व्रत-कथा सुनकर मौन होकर स्वयं भोजन करें, और शेष रात भजन-वाद्य के साथ बिताएँ।
- संकष्टी चतुर्थी के क्या लाभ हैं?
- एक वर्ष तक व्रत करने से सब पाप नष्ट होते हैं, उत्तम पुत्र होता है, और जो भी कामना करे वह पूरी होती है। सब संकट नष्ट होते हैं और शत्रु-सेना का भय नहीं रहता। स्रोत कहता है कि अंधा, गूँगा, जड़ या लँगड़ा भी इच्छित फल पाता है, और पत्नी, पुत्र, धन और राज्य मिलते हैं।
- संकष्टी चतुर्थी में क्या ध्यान रखें?
- स्रोत में यह व्रत एक वर्ष तक हर कृष्ण चतुर्थी को करने का विधान है। वर्ष-भर के लिए स्रोत हर महीने का अलग आहार बताता है: श्रावण में सात लड्डू, भाद्रपद में दही, आश्विन में उपवास, कार्तिक में दूध, मार्गशीर्ष में निराहार, पौष में गोमूत्र, माघ में तिल, फाल्गुन में घी-शक्कर, चैत्र में पंचगव्य, वैशाख में शतपत्रिका, ज्येष्ठ में घी, आषाढ़ में मधु। चन्द्रोदय का समय हर स्थान पर अलग होता है; अपने शहर का चन्द्रोदय-समय पंचांग में देखें। (सामान्य प्रचलन) जिस दिन चन्द्रोदय के समय कृष्ण चतुर्थी हो, प्रायः उसी दिन संकष्टी मनाई जाती है। मंगलवार को पड़ने वाली संकष्टी को "अंगारकी" कहा जाता है। (सामान्य प्रचलन) बादल होने पर भी बहुत से लोग पंचांग के चन्द्रोदय-समय पर अर्घ्य देकर व्रत खोलते हैं। (सामान्य प्रचलन) उपवास से पहले अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। गर्भवती, बीमार, मधुमेह के रोगी, बुज़ुर्ग या नियमित दवा लेने वाले लोग डॉक्टर की सलाह से ही कठोर या निर्जल उपवास करें; ऐसे लोग प्रायः फलाहार या एक समय भोजन जैसा हल्का नियम अपनाते हैं। (सामान्य प्रचलन)
- संकष्टी चतुर्थी में क्या नहीं करना चाहिए?
- दूसरों की निंदा न करें। बुरे कर्म, पान (ताम्बूल), जल-पान, दूसरों का अहित और चुगली से बचें।
स्रोत और लाइसेंस
- Ganesha Purana, Upasana Khanda ch. 59 (page "adhyayas 56-60"), Sanskrit Wikisource, revision 315600. CC BY-SA 4.0 (Wikisource transcription); underlying text public domain