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चौघड़िया क्या है: दिन का शुभ और अशुभ समय कैसे देखें

चौघड़िया दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटता है। जानिए इसके सात प्रकार, यात्रा, व्यापार और पूजा के लिए कौन सा अच्छा है और आज की सूची कैसे पढ़ें।

लेखक: Vedic Drishti Team · · 3 मिनट

रोज़ के कामों के लिए अच्छा समय चुनने का सबसे आसान तरीका चौघड़िया है: यात्रा पर निकलना, दुकान खोलना, भुगतान करना या छोटी पूजा शुरू करना। गुजरात, राजस्थान और महाराष्ट्र में तो बहुत से परिवार किसी भी ज़रूरी काम से पहले चौघड़िया ज़रूर देखते हैं।

चौघड़िया कैसे निकाला जाता है

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है, और सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक की रात को भी आठ भागों में। हर भाग एक चौघड़िया है। नाम का अर्थ है "चार घड़ी": एक घड़ी 24 मिनट की होती है, इसलिए 12 घंटे के दिन में एक चौघड़िया 96 मिनट, यानी लगभग डेढ़ घंटे का होता है।

राहु काल की तरह चौघड़िया भी आपके शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त पर निर्भर है। गर्मियों में दिन के चौघड़िया लंबे और रात के छोटे होते हैं, सर्दियों में इसका उल्टा। इसलिए किसी और शहर या मौसम के लिए छपी तालिका आपके लिए कई मिनट गलत हो सकती है।

चौघड़िया के सात प्रकार

सात चौघड़िया हैं, और हर एक का संबंध एक ग्रह से है:

  • अमृत (चंद्र): सबसे श्रेष्ठ; हर शुभ काम के लिए।
  • शुभ (गुरु): शुभ; संस्कार, विवाह, पढ़ाई और धार्मिक काम।
  • लाभ (बुध): लाभ; व्यापार, लेन-देन, शिक्षा और धन संबंधी काम।
  • चर (शुक्र): गति; यात्रा और वाहन के लिए अच्छा, बाकी कामों के लिए सामान्य।
  • उद्वेग (सूर्य): बेचैनी; नए काम के लिए टाला जाता है, हालाँकि सरकारी काम के लिए कुछ लोग इसे ठीक मानते हैं।
  • रोग (मंगल): रोग और विवाद; टाला जाता है।
  • काल (शनि): हानि; नई शुरुआत के लिए टाला जाता है।

यानी अमृत, शुभ और लाभ अच्छे हैं, चर सामान्य है, और उद्वेग, रोग तथा काल में नया काम न करना ही ठीक माना जाता है।

दिन में चौघड़िया का क्रम

दिन का पहला चौघड़िया उस वार के स्वामी ग्रह का होता है:

  • रविवार: उद्वेग से शुरू (सूर्य)
  • सोमवार: अमृत से शुरू (चंद्र)
  • मंगलवार: रोग से शुरू (मंगल)
  • बुधवार: लाभ से शुरू (बुध)
  • गुरुवार: शुभ से शुरू (गुरु)
  • शुक्रवार: चर से शुरू (शुक्र)
  • शनिवार: काल से शुरू (शनि)

इसके बाद क्रम सूर्य, शुक्र, बुध, चंद्र, शनि, गुरु, मंगल के अनुसार चलता है और आठवाँ चौघड़िया पहले वाला ही होता है। जैसे सोमवार को दिन का क्रम है: अमृत, काल, शुभ, रोग, उद्वेग, चर, लाभ और फिर अमृत। रात का क्रम अलग ग्रह से शुरू होता है, इसलिए रात की सूची हमेशा अलग से देखें।

चौघड़िया और राहु काल

राहु काल अलग से निकाला जाता है और किसी अच्छे चौघड़िया के बीच भी पड़ सकता है। बहुत से लोग राहु काल को अधिक महत्व देते हैं: अगर शुभ या लाभ चौघड़िया में राहु काल आ रहा हो, तो वे उसका बाहर वाला हिस्सा चुनते हैं।

चौघड़िया का सही उपयोग

  • यात्रा: चर, अमृत, शुभ या लाभ।
  • दुकान खोलना, सौदा या भुगतान: लाभ, अमृत या शुभ।
  • पूजा, नामकरण या छोटा संस्कार: शुभ या अमृत।

चौघड़िया रोज़ के निर्णयों के लिए है। विवाह, गृह प्रवेश या बड़े व्यवसाय की शुरुआत के लिए तिथि, नक्षत्र और अपनी कुंडली देखकर पूरा मुहूर्त निकालना बेहतर है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या पूरे भारत में चौघड़िया एक जैसा है? नाम और क्रम वही हैं, पर घड़ी का समय नहीं, क्योंकि यह हर शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त से निकलता है।

क्या चर चौघड़िया में काम शुरू कर सकते हैं? यात्रा और वाहन के लिए हाँ। बाकी कामों के लिए चर सामान्य माना जाता है: बेहतर समय न हो तो चल जाता है।

क्या चौघड़िया देखने पर राहु काल देखना ज़रूरी नहीं? दोनों अलग हैं, और बहुत से लोग दोनों देखते हैं।

अपने शहर का आज का चौघड़िया

वैदिक दृष्टि पंचांग के हर पेज पर आपके शहर के वास्तविक सूर्योदय और सूर्यास्त से निकाले गए दिन और रात के चौघड़िया, राहु काल के साथ दिए जाते हैं। जैसे अहमदाबाद, जयपुर या पुणे। "यह काम कब करूँ?" का सीधा उत्तर पाने के लिए शुभ मुहूर्त देखें।

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