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आज का राहु काल: अर्थ, समय और किन कामों से बचें

राहु काल क्या है, आपके शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त से इसका समय कैसे निकलता है, हर वार का क्रम क्या है और इसमें कौन से नए काम शुरू नहीं किए जाते।

लेखक: Vedic Drishti Team · · 4 मिनट

राहु काल हर दिन लगभग डेढ़ घंटे का वह समय है जिसमें बहुत से परिवार कोई नया और महत्वपूर्ण काम शुरू नहीं करते। यह घड़ी का कोई तय समय नहीं है: यह आपके शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलता है, इसलिए एक ही दिन दिल्ली और चेन्नई के राहु काल में कई मिनट का अंतर हो सकता है।

राहु काल क्या है?

वैदिक ज्योतिष में राहु नौ ग्रहों में से एक है। यह कोई भौतिक ग्रह नहीं, बल्कि आकाश का वह बिंदु है जहाँ चंद्रमा का मार्ग सूर्य के मार्ग को काटता है। राहु को भ्रम, अचानक आने वाली बाधाओं और योजना से अलग परिणाम से जोड़ा जाता है।

राहु काल (राहु कालम) दिन का वह भाग है जिस पर परंपरा के अनुसार राहु का प्रभाव माना जाता है। मान्यता है कि इसमें शुरू किया गया काम देर से पूरा होता है या उसका परिणाम सोच से अलग होता है। इसलिए लोग इस समय नया व्यवसाय, ज़रूरी कागज़ों पर हस्ताक्षर या लंबी यात्रा शुरू करना टालते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है

अपने शहर का सूर्योदय और सूर्यास्त पता हो तो गणना आसान है:

  1. सूर्योदय से सूर्यास्त तक दिन की कुल अवधि लें।
  2. इसे आठ बराबर भागों में बाँटें।
  3. हर वार के लिए इन आठ में से एक तय भाग राहु काल होता है।

साल भर दिन की लंबाई बदलती है, इसलिए राहु काल की अवधि भी बदलती है। जून में दिल्ली में दिन लगभग 14 घंटे का होता है, तो राहु काल करीब 1 घंटा 45 मिनट का होता है। दिसंबर में दिन 10 घंटे से थोड़ा अधिक होता है, तब राहु काल लगभग 77 मिनट का रह जाता है।

हर वार का राहु काल

नीचे दिन के वे भाग दिए गए हैं जो राहु के हैं। कोष्ठक में दिया समय केवल सुबह 6 से शाम 6 बजे के 12 घंटे वाले दिन के लिए है; आपका वास्तविक समय आपके शहर पर निर्भर करता है।

  • सोमवार: दूसरा भाग (लगभग सुबह 7:30 से 9:00)
  • मंगलवार: सातवाँ भाग (लगभग दोपहर 3:00 से 4:30)
  • बुधवार: पाँचवाँ भाग (लगभग दोपहर 12:00 से 1:30)
  • गुरुवार: छठा भाग (लगभग दोपहर 1:30 से 3:00)
  • शुक्रवार: चौथा भाग (लगभग सुबह 10:30 से दोपहर 12:00)
  • शनिवार: तीसरा भाग (लगभग सुबह 9:00 से 10:30)
  • रविवार: आठवाँ भाग (लगभग शाम 4:30 से 6:00)

राहु काल में किन कामों से बचते हैं

राहु काल का संबंध शुरुआत से है। जो परिवार इसे मानते हैं, वे आमतौर पर इन कामों की शुरुआत टालते हैं:

  • नया व्यवसाय, दुकान या दफ़्तर खोलना
  • मकान, ज़मीन, वाहन या सोना ख़रीदना
  • कोई बड़ा अनुबंध, ऋण या निवेश
  • लंबी यात्रा, अगर वह पहले या बाद में शुरू हो सके
  • गृह प्रवेश, सगाई या विवाह की रस्में

रोज़ का काम, दफ़्तर, खाना बनाना, पढ़ाई और नियमित पूजा सामान्य रूप से चलते रहते हैं। दक्षिण भारत के कई मंदिरों में तो राहु काल के समय विशेष दुर्गा पूजा होती है, क्योंकि उस समय की प्रार्थना से राहु का प्रभाव शांत होता है, ऐसी मान्यता है।

राहु काल, यमगंड और गुलिक काल

दिन के इन्हीं आठ भागों से दो और समय निकलते हैं जो पंचांग में राहु काल के साथ दिए जाते हैं। यमगंड भी नए काम के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। गुलिक काल के बारे में मान्यता है कि इसमें शुरू हुआ काम दोहराया जाता है, इसलिए लोग इसमें ऋण लेने जैसे काम नहीं करते।

अगर काम राहु काल में ही शुरू करना पड़े?

हर बार घड़ी के अनुसार चलना संभव नहीं होता। पारंपरिक उपाय यह है कि तैयारी राहु काल से पहले शुरू कर दी जाए, या दोपहर के आसपास का अभिजीत मुहूर्त चुना जाए (बुधवार को छोड़कर, क्योंकि उस दिन राहु काल दोपहर में ही होता है)। विवाह या गृह प्रवेश जैसे बड़े अवसरों के लिए केवल राहु काल नहीं, तिथि और नक्षत्र देखकर पूरा मुहूर्त निकालना अधिक ज़रूरी है।

आज का सटीक राहु काल देखें

वैदिक दृष्टि हर दिन आपके शहर के वास्तविक सूर्योदय और सूर्यास्त से राहु काल, यमगंड, गुलिक और चौघड़िया निकालता है। आज का पंचांग खोलें और अपना शहर चुनें, जैसे दिल्ली, लखनऊ या वाराणसी। किसी ख़ास काम का सही समय जानने के लिए शुभ मुहूर्त देखें।

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