गृह प्रवेश मुहूर्त: शुभ तारीख़ कैसे चुनें
गृह प्रवेश के लिए परंपरा से शुभ माने जाने वाले महीने, तिथि, नक्षत्र और वार, किन समयों से बचें, और अपने परिवार के लिए सही तारीख़ कैसे चुनें।
नए घर में प्रवेश परिवार के लिए सबसे खुशी के दिनों में से एक होता है, और अधिकतर भारतीय परिवार इसकी शुरुआत शुभ समय में करना चाहते हैं। गृह प्रवेश मुहूर्त में ऋतु, तिथि, चंद्र नक्षत्र, वार और लग्न, सबका ध्यान रखा जाता है। आइए देखें कि परंपरा से हर एक कैसे चुना जाता है।
गृह प्रवेश के तीन प्रकार
- अपूर्व: नए बने या नए ख़रीदे घर में पहली बार प्रवेश।
- सपूर्व: लंबे समय बाद, जैसे विदेश प्रवास के बाद, घर लौटना।
- द्वंद्व: बड़ी मरम्मत या पुनर्निर्माण के बाद दोबारा प्रवेश।
सबसे कड़े नियम अपूर्व, यानी नए घर के पहले प्रवेश पर लागू होते हैं।
शुभ महीने
परंपरा में माघ, फाल्गुन, वैशाख और ज्येष्ठ महीने गृह प्रवेश के लिए सबसे शुभ माने जाते हैं। अंग्रेज़ी कैलेंडर में ये वर्ष के अनुसार लगभग जनवरी के अंत से जून तक पड़ते हैं।
आमतौर पर इन समयों से बचा जाता है:
- चातुर्मास, देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक के वर्षा ऋतु के चार महीने।
- अधिक मास, जो कुछ वर्षों में जुड़ता है।
- खरमास, जब सूर्य धनु या मीन राशि में हो, लगभग मध्य दिसंबर से मध्य जनवरी और मध्य मार्च से मध्य अप्रैल।
- जब गुरु या शुक्र अस्त हों।
तिथि
शुक्ल पक्ष को प्राथमिकता दी जाती है। द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी और त्रयोदशी शुभ मानी जाती हैं। रिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी) और अमावस्या टाली जाती हैं।
नक्षत्र
परिवार अच्छी तरह बस सके, इसलिए स्थिर और सौम्य नक्षत्र चुने जाते हैं: रोहिणी, मृगशिरा, उत्तरा फाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, चित्रा, अनुराधा और रेवती।
वार
सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार आमतौर पर शुभ माने जाते हैं। पहले प्रवेश के लिए मंगलवार और शनिवार प्रायः टाले जाते हैं, और बहुत से परिवार रविवार भी टालते हैं।
लग्न
शुभ दिन के भीतर ज्योतिषी स्थिर लग्न (वृषभ, सिंह, वृश्चिक या कुंभ) देखते हैं, जिसे स्थिरता से जोड़ा जाता है। फिर उसी अवधि में, राहु काल छोड़कर, प्रवेश का सटीक समय तय किया जाता है।
परिवार की अपनी कुंडली
सामान्य रूप से शुभ दिन भी किसी परिवार के लिए कमज़ोर हो सकता है। इसलिए ज्योतिषी घर के मुखिया के लिए चंद्र बल और तारा बल भी देखते हैं। यही कारण है कि एक ही महीने में अलग-अलग परिवारों को अलग तारीख़ें बताई जाती हैं।
गृह प्रवेश के दिन
रीति-रिवाज क्षेत्र के अनुसार बदलते हैं, पर बहुत से परिवार गणेश पूजा और वास्तु पूजा से शुरुआत करते हैं, जल से भरा कलश लेकर दाहिना पैर पहले रखकर प्रवेश करते हैं, और नई रसोई में दूध उबालकर उफनने देते हैं, जो समृद्धि का प्रतीक है। पूरी पूजा हो तो पंडित जी से पूछ लें कि उसमें कितना समय लगेगा, ताकि मुख्य विधि मुहूर्त के भीतर हो।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या गृह प्रवेश से पहले सामान रख सकते हैं? बहुत से परिवार फ़र्नीचर और सामान पहले ही पहुँचा देते हैं, पर गृह प्रवेश होने तक वहाँ खाना नहीं बनाते और रात नहीं रुकते। रीति अलग-अलग है, इसलिए अपने परिवार की परंपरा मानें।
क्या किराए के घर के लिए भी मुहूर्त देखा जाता है? हाँ, बहुत से लोग किराए के घर में जाने के लिए भी अच्छा दिन चुनते हैं, आमतौर पर सरल पूजा के साथ। कड़े नियम मुख्य रूप से अपने घर के पहले प्रवेश पर लागू होते हैं।
अगर शिफ़्ट करने की तारीख़ तक कोई शुभ दिन न मिले? शुक्ल पक्ष का सबसे अच्छा उपलब्ध दिन चुनें, राहु काल और रिक्ता तिथियाँ टालें, और मुख्य पूजा अच्छे चौघड़िया में करें। ज़रूरत हो तो ज्योतिषी उचित उपाय बता सकते हैं।
गृह प्रवेश की तारीख़ें देखें
शुभ मुहूर्त आपके शहर के लिए महीना, तिथि, नक्षत्र, वार और राहु काल देखकर गृह प्रवेश के उपयुक्त समय बताता है। हर दिन की तिथि और नक्षत्र आज के पंचांग में भी देख सकते हैं।