अंतिम अपडेट · स्विस एफ़ेमेरिस, लाहिड़ी अयनांश
वृश्चिक राशि: स्वामी मंगल, नक्षत्र, नाम अक्षर और चंद्रमा की तारीख़ें
वृश्चिक राशि क्या है?
वृश्चिक (Scorpio) 12 निरयण राशियों में 8वीं राशि है, राशिचक्र के 210° से 240° तक। इसका स्वामी मंगल है, तत्व जल और यह स्थिर राशि है।
चंद्रमा अगली बार वृश्चिक में 10 नवंबर 2026, रात 2:48 IST से 12 नवंबर 2026, दोपहर 2:19 IST तक रहेगा। 2026 में सूर्य वृश्चिक में 16 नवंबर 2026, शाम 7:43 IST से 16 दिसंबर 2026, सुबह 10:25 IST तक है।
वृश्चिक राशि का स्वामी कौन है?
वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल है। तालिका में राशि के स्थिर तथ्य हैं।
| राशि | वृश्चिक (Scorpio) |
| क्रम | 8 |
| निरयण विस्तार | 210°–240° |
| स्वामी ग्रह | मंगल |
| तत्व | जल |
| स्वभाव | स्थिर |
| प्रतीक | बिच्छू |
| नक्षत्र | विशाखा चरण 4, अनुराधा चरण 1–4, ज्येष्ठा चरण 1–4 |
वृश्चिक राशि में कौन से नक्षत्र हैं?
विशाखा चरण 4, अनुराधा चरण 1–4, ज्येष्ठा चरण 1–4.
वृश्चिक राशि के नाम किस अक्षर से शुरू होते हैं?
तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू. नक्षत्र से बच्चों के नाम
चंद्रमा अगली बार वृश्चिक में कब है?
| चंद्रमा का प्रवेश | चंद्रमा का निकास | अवधि |
|---|---|---|
| 59 घंटे 30 मिनट | ||
| 59 घंटे 46 मिनट | ||
| 60 घंटे 6 मिनट |
सूर्य वृश्चिक में कब प्रवेश करता है?
सूर्य का निरयण राशि में प्रवेश वृश्चिक संक्रांति कहलाता है। तारीख़ें भारतीय पंचांगों के निरयण (लाहिड़ी) राशिचक्र की हैं, पश्चिमी सायन राशिचक्र की नहीं।
| वर्ष | सूर्य का प्रवेश | सूर्य का निकास |
|---|---|---|
| 2026 | ||
| 2027 |
अन्य राशियाँ
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- वृश्चिक राशि का स्वामी कौन है?
- वृश्चिक राशि का स्वामी मंगल है।
- वृश्चिक राशि में कौन से नक्षत्र आते हैं?
- विशाखा चरण 4, अनुराधा चरण 1–4, ज्येष्ठा चरण 1–4.
- वृश्चिक राशि के नाम अक्षर कौन से हैं?
- तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू.
- चंद्रमा वृश्चिक में कब है?
- चंद्रमा अगली बार वृश्चिक में 10 नवंबर 2026, रात 2:48 IST से 12 नवंबर 2026, दोपहर 2:19 IST तक रहेगा।
- 2026 में सूर्य वृश्चिक में कब है?
- 2026 में सूर्य वृश्चिक में 16 नवंबर 2026, शाम 7:43 IST से 16 दिसंबर 2026, सुबह 10:25 IST तक है।
- क्या वृश्चिक पश्चिमी ज्योतिष की Scorpio राशि ही है?
- नाम से यह राशिचक्र का वही बारहवाँ भाग है, पर भारतीय ज्योतिष इसे निरयण राशिचक्र में मापता है, जो अब पश्चिमी सायन राशिचक्र से लगभग 24° पीछे है। इसलिए सूर्य वृश्चिक में पश्चिमी Scorpio से लगभग तीन सप्ताह बाद प्रवेश करता है।
स्थिति: निरयण राशिचक्र, लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, डेटा फ़ाइलों सहित स्विस एफ़ेमेरिस। समय भारतीय मानक समय (IST, UTC+05:30) में, जिस क्षण चंद्रमा या सूर्य सीमा पार करता है, मिनट तक (सेकंड छोड़कर)। यह क्षण हर जगह एक ही है, केवल घड़ी का समय बदलता है। स्वामी, तत्व और स्वभाव: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 4। गणना पद्धति