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अंतिम अपडेट · स्विस एफ़ेमेरिस, लाहिड़ी अयनांश

विशाखा नक्षत्र: स्वामी गुरु, देवता, चरण, नाम अक्षर और चंद्रमा की तारीख़ें

विशाखा नक्षत्र क्या है?

विशाखा 27 नक्षत्रों में 16वाँ नक्षत्र है, 20°00′ तुला – 3°20′ वृश्चिक तक (निरयण 200°00′–213°20′)। इसका विंशोत्तरी स्वामी गुरु है और देवता इंद्राग्नि।

चंद्रमा अगली बार विशाखा नक्षत्र में 9 नवंबर 2026, सुबह 7:24 IST से 10 नवंबर 2026, सुबह 9:19 IST तक रहेगा।

विशाखा नक्षत्र का स्वामी कौन है?

विंशोत्तरी पद्धति में विशाखा का स्वामी गुरु है, इसलिए विशाखा नक्षत्र में चंद्रमा के साथ जन्मे व्यक्ति का जीवन गुरु की दशा से शुरू होता है। नीचे गण, योनि और नाड़ी वही हैं जो कुंडली मिलान में लिए जाते हैं।

क्रम16 / 27
विस्तार20°00′ तुला – 3°20′ वृश्चिक (200°00′–213°20′)
राशितुला, वृश्चिक
विंशोत्तरी स्वामीगुरु (16 वर्ष की दशा)
देवताइंद्राग्नि
गणराक्षस
योनिव्याघ्र (बाघ)
नाड़ीअन्त्य

विशाखा नक्षत्र के चरण और नाम अक्षर क्या हैं?

हर चरण 3°20′ का है। परंपरा से किसी चरण में जन्मे बच्चे का नाम उस चरण के अक्षर से रखा जाता है।

चरणविस्तारराशिनाम अक्षर
120°00′ तुला – 23°20′ तुलातुलाती
223°20′ तुला – 26°40′ तुलातुलातू
326°40′ तुला – 30°00′ तुलातुलाते
40°00′ वृश्चिक – 3°20′ वृश्चिकवृश्चिकतो

नक्षत्र से बच्चों के नाम

चंद्रमा अगली बार विशाखा नक्षत्र में कब है?

पंचांग में दिन का नक्षत्र वही होता है जिसमें चंद्रमा हो। ये विशाखा में चंद्रमा के अगले गोचर हैं।

चंद्रमा का प्रवेशचंद्रमा का निकासअवधि
25 घंटे 55 मिनट
26 घंटे 9 मिनट
26 घंटे 17 मिनट

शहर के अनुसार आज का पंचांग

अन्य नक्षत्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विशाखा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
गुरु (16 वर्ष की विंशोत्तरी दशा)।
विशाखा नक्षत्र किस राशि में है?
विशाखा तुला और वृश्चिक में है: 20°00′ तुला – 3°20′ वृश्चिक।
विशाखा नक्षत्र का गण क्या है?
राक्षस; योनि व्याघ्र (बाघ); नाड़ी अन्त्य।
विशाखा नक्षत्र के नाम अक्षर कौन से हैं?
चरण 1 से 4: ती, तू, ते, तो।
विशाखा नक्षत्र के देवता कौन हैं?
इंद्राग्नि, तैत्तिरीय ब्राह्मण के अनुसार।
विशाखा नक्षत्र अगली बार कब है?
चंद्रमा अगली बार विशाखा नक्षत्र में 9 नवंबर 2026, सुबह 7:24 IST से 10 नवंबर 2026, सुबह 9:19 IST तक रहेगा।

स्थिति: निरयण राशिचक्र, लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, डेटा फ़ाइलों सहित स्विस एफ़ेमेरिस। समय भारतीय मानक समय (IST, UTC+05:30) में, जिस क्षण चंद्रमा या सूर्य सीमा पार करता है, मिनट तक (सेकंड छोड़कर)। यह क्षण हर जगह एक ही है, केवल घड़ी का समय बदलता है। स्वामी: विंशोत्तरी दशा क्रम (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 46)। देवता: तैत्तिरीय ब्राह्मण 3.1। गण, योनि, नाड़ी: हमारे कुंडली मिलान की अष्टकूट तालिकाएँ। नाम अक्षर: अवकहड़ा चक्र। गणना पद्धति