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अंतिम अपडेट · स्विस एफ़ेमेरिस, लाहिड़ी अयनांश

पुनर्वसु नक्षत्र: स्वामी गुरु, देवता, चरण, नाम अक्षर और चंद्रमा की तारीख़ें

पुनर्वसु नक्षत्र क्या है?

पुनर्वसु 27 नक्षत्रों में 7वाँ नक्षत्र है, 20°00′ मिथुन – 3°20′ कर्क तक (निरयण 80°00′–93°20′)। इसका विंशोत्तरी स्वामी गुरु है और देवता अदिति।

चंद्रमा अगली बार पुनर्वसु नक्षत्र में 27 नवंबर 2026, दोपहर 3:08 IST से 28 नवंबर 2026, दोपहर 12:50 IST तक रहेगा।

पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी कौन है?

विंशोत्तरी पद्धति में पुनर्वसु का स्वामी गुरु है, इसलिए पुनर्वसु नक्षत्र में चंद्रमा के साथ जन्मे व्यक्ति का जीवन गुरु की दशा से शुरू होता है। नीचे गण, योनि और नाड़ी वही हैं जो कुंडली मिलान में लिए जाते हैं।

क्रम7 / 27
विस्तार20°00′ मिथुन – 3°20′ कर्क (80°00′–93°20′)
राशिमिथुन, कर्क
विंशोत्तरी स्वामीगुरु (16 वर्ष की दशा)
देवताअदिति
गणदेव
योनिमार्जार (बिल्ली)
नाड़ीआदि

पुनर्वसु नक्षत्र के चरण और नाम अक्षर क्या हैं?

हर चरण 3°20′ का है। परंपरा से किसी चरण में जन्मे बच्चे का नाम उस चरण के अक्षर से रखा जाता है।

चरणविस्तारराशिनाम अक्षर
120°00′ मिथुन – 23°20′ मिथुनमिथुनके
223°20′ मिथुन – 26°40′ मिथुनमिथुनको
326°40′ मिथुन – 30°00′ मिथुनमिथुनहा
40°00′ कर्क – 3°20′ कर्ककर्कही

नक्षत्र से बच्चों के नाम

चंद्रमा अगली बार पुनर्वसु नक्षत्र में कब है?

पंचांग में दिन का नक्षत्र वही होता है जिसमें चंद्रमा हो। ये पुनर्वसु में चंद्रमा के अगले गोचर हैं।

चंद्रमा का प्रवेशचंद्रमा का निकासअवधि
21 घंटे 41 मिनट
21 घंटे 2 मिनट
21 घंटे 1 मिनट

शहर के अनुसार आज का पंचांग

अन्य नक्षत्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी कौन है?
गुरु (16 वर्ष की विंशोत्तरी दशा)।
पुनर्वसु नक्षत्र किस राशि में है?
पुनर्वसु मिथुन और कर्क में है: 20°00′ मिथुन – 3°20′ कर्क।
पुनर्वसु नक्षत्र का गण क्या है?
देव; योनि मार्जार (बिल्ली); नाड़ी आदि।
पुनर्वसु नक्षत्र के नाम अक्षर कौन से हैं?
चरण 1 से 4: के, को, हा, ही।
पुनर्वसु नक्षत्र के देवता कौन हैं?
अदिति, तैत्तिरीय ब्राह्मण के अनुसार।
पुनर्वसु नक्षत्र अगली बार कब है?
चंद्रमा अगली बार पुनर्वसु नक्षत्र में 27 नवंबर 2026, दोपहर 3:08 IST से 28 नवंबर 2026, दोपहर 12:50 IST तक रहेगा।

स्थिति: निरयण राशिचक्र, लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, डेटा फ़ाइलों सहित स्विस एफ़ेमेरिस। समय भारतीय मानक समय (IST, UTC+05:30) में, जिस क्षण चंद्रमा या सूर्य सीमा पार करता है, मिनट तक (सेकंड छोड़कर)। यह क्षण हर जगह एक ही है, केवल घड़ी का समय बदलता है। स्वामी: विंशोत्तरी दशा क्रम (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 46)। देवता: तैत्तिरीय ब्राह्मण 3.1। गण, योनि, नाड़ी: हमारे कुंडली मिलान की अष्टकूट तालिकाएँ। नाम अक्षर: अवकहड़ा चक्र। गणना पद्धति