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ज्येष्ठा नक्षत्र: स्वामी बुध, देवता, चरण, नाम अक्षर और चंद्रमा की तारीख़ें
ज्येष्ठा नक्षत्र क्या है?
ज्येष्ठा 27 नक्षत्रों में 18वाँ नक्षत्र है, 16°40′ वृश्चिक – 30°00′ वृश्चिक तक (निरयण 226°40′–240°00′)। इसका विंशोत्तरी स्वामी बुध है और देवता इंद्र।
चंद्रमा अगली बार ज्येष्ठा नक्षत्र में 11 नवंबर 2026, सुबह 11:38 IST से 12 नवंबर 2026, दोपहर 2:19 IST तक रहेगा।
ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
विंशोत्तरी पद्धति में ज्येष्ठा का स्वामी बुध है, इसलिए ज्येष्ठा नक्षत्र में चंद्रमा के साथ जन्मे व्यक्ति का जीवन बुध की दशा से शुरू होता है। नीचे गण, योनि और नाड़ी वही हैं जो कुंडली मिलान में लिए जाते हैं।
| क्रम | 18 / 27 |
| विस्तार | 16°40′ वृश्चिक – 30°00′ वृश्चिक (226°40′–240°00′) |
| राशि | वृश्चिक |
| विंशोत्तरी स्वामी | बुध (17 वर्ष की दशा) |
| देवता | इंद्र |
| गण | राक्षस |
| योनि | मृग (हिरण) |
| नाड़ी | आदि |
ज्येष्ठा नक्षत्र के चरण और नाम अक्षर क्या हैं?
हर चरण 3°20′ का है। परंपरा से किसी चरण में जन्मे बच्चे का नाम उस चरण के अक्षर से रखा जाता है।
चंद्रमा अगली बार ज्येष्ठा नक्षत्र में कब है?
पंचांग में दिन का नक्षत्र वही होता है जिसमें चंद्रमा हो। ये ज्येष्ठा में चंद्रमा के अगले गोचर हैं।
| चंद्रमा का प्रवेश | चंद्रमा का निकास | अवधि |
|---|---|---|
| 26 घंटे 40 मिनट | ||
| 26 घंटे 44 मिनट | ||
| 26 घंटे 52 मिनट |
अन्य नक्षत्र
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
- बुध (17 वर्ष की विंशोत्तरी दशा)।
- ज्येष्ठा नक्षत्र किस राशि में है?
- ज्येष्ठा वृश्चिक में है: 16°40′ वृश्चिक – 30°00′ वृश्चिक।
- ज्येष्ठा नक्षत्र का गण क्या है?
- राक्षस; योनि मृग (हिरण); नाड़ी आदि।
- ज्येष्ठा नक्षत्र के नाम अक्षर कौन से हैं?
- चरण 1 से 4: नो, या, यी, यू।
- ज्येष्ठा नक्षत्र के देवता कौन हैं?
- इंद्र, तैत्तिरीय ब्राह्मण के अनुसार।
- ज्येष्ठा नक्षत्र अगली बार कब है?
- चंद्रमा अगली बार ज्येष्ठा नक्षत्र में 11 नवंबर 2026, सुबह 11:38 IST से 12 नवंबर 2026, दोपहर 2:19 IST तक रहेगा।
स्थिति: निरयण राशिचक्र, लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, डेटा फ़ाइलों सहित स्विस एफ़ेमेरिस। समय भारतीय मानक समय (IST, UTC+05:30) में, जिस क्षण चंद्रमा या सूर्य सीमा पार करता है, मिनट तक (सेकंड छोड़कर)। यह क्षण हर जगह एक ही है, केवल घड़ी का समय बदलता है। स्वामी: विंशोत्तरी दशा क्रम (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 46)। देवता: तैत्तिरीय ब्राह्मण 3.1। गण, योनि, नाड़ी: हमारे कुंडली मिलान की अष्टकूट तालिकाएँ। नाम अक्षर: अवकहड़ा चक्र। गणना पद्धति