अंतिम अपडेट · स्विस एफ़ेमेरिस, लाहिड़ी अयनांश
मूल नक्षत्र: स्वामी केतु, देवता, चरण, नाम अक्षर और चंद्रमा की तारीख़ें
मूल नक्षत्र क्या है?
मूल 27 नक्षत्रों में 19वाँ नक्षत्र है, 0°00′ धनु – 13°20′ धनु तक (निरयण 240°00′–253°20′)। इसका विंशोत्तरी स्वामी केतु है और देवता निर्ऋति।
चंद्रमा अगली बार मूल नक्षत्र में 12 नवंबर 2026, दोपहर 2:19 IST से 13 नवंबर 2026, शाम 5:17 IST तक रहेगा।
मूल नक्षत्र का स्वामी कौन है?
विंशोत्तरी पद्धति में मूल का स्वामी केतु है, इसलिए मूल नक्षत्र में चंद्रमा के साथ जन्मे व्यक्ति का जीवन केतु की दशा से शुरू होता है। नीचे गण, योनि और नाड़ी वही हैं जो कुंडली मिलान में लिए जाते हैं।
| क्रम | 19 / 27 |
| विस्तार | 0°00′ धनु – 13°20′ धनु (240°00′–253°20′) |
| राशि | धनु |
| विंशोत्तरी स्वामी | केतु (7 वर्ष की दशा) |
| देवता | निर्ऋति |
| गण | राक्षस |
| योनि | श्वान (कुत्ता) |
| नाड़ी | आदि |
मूल नक्षत्र के चरण और नाम अक्षर क्या हैं?
हर चरण 3°20′ का है। परंपरा से किसी चरण में जन्मे बच्चे का नाम उस चरण के अक्षर से रखा जाता है।
चंद्रमा अगली बार मूल नक्षत्र में कब है?
पंचांग में दिन का नक्षत्र वही होता है जिसमें चंद्रमा हो। ये मूल में चंद्रमा के अगले गोचर हैं।
| चंद्रमा का प्रवेश | चंद्रमा का निकास | अवधि |
|---|---|---|
| 26 घंटे 58 मिनट | ||
| 26 घंटे 57 मिनट | ||
| 27 घंटे 1 मिनट |
अन्य नक्षत्र
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- मूल नक्षत्र का स्वामी कौन है?
- केतु (7 वर्ष की विंशोत्तरी दशा)।
- मूल नक्षत्र किस राशि में है?
- मूल धनु में है: 0°00′ धनु – 13°20′ धनु।
- मूल नक्षत्र का गण क्या है?
- राक्षस; योनि श्वान (कुत्ता); नाड़ी आदि।
- मूल नक्षत्र के नाम अक्षर कौन से हैं?
- चरण 1 से 4: ये, यो, भा, भी।
- मूल नक्षत्र के देवता कौन हैं?
- निर्ऋति, तैत्तिरीय ब्राह्मण के अनुसार।
- मूल नक्षत्र अगली बार कब है?
- चंद्रमा अगली बार मूल नक्षत्र में 12 नवंबर 2026, दोपहर 2:19 IST से 13 नवंबर 2026, शाम 5:17 IST तक रहेगा।
स्थिति: निरयण राशिचक्र, लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, डेटा फ़ाइलों सहित स्विस एफ़ेमेरिस। समय भारतीय मानक समय (IST, UTC+05:30) में, जिस क्षण चंद्रमा या सूर्य सीमा पार करता है, मिनट तक (सेकंड छोड़कर)। यह क्षण हर जगह एक ही है, केवल घड़ी का समय बदलता है। स्वामी: विंशोत्तरी दशा क्रम (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 46)। देवता: तैत्तिरीय ब्राह्मण 3.1। गण, योनि, नाड़ी: हमारे कुंडली मिलान की अष्टकूट तालिकाएँ। नाम अक्षर: अवकहड़ा चक्र। गणना पद्धति