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आश्लेषा नक्षत्र: स्वामी बुध, देवता, चरण, नाम अक्षर और चंद्रमा की तारीख़ें
आश्लेषा नक्षत्र क्या है?
आश्लेषा 27 नक्षत्रों में 9वाँ नक्षत्र है, 16°40′ कर्क – 30°00′ कर्क तक (निरयण 106°40′–120°00′)। इसका विंशोत्तरी स्वामी बुध है और देवता सर्प (नाग)।
चंद्रमा अगली बार आश्लेषा नक्षत्र में 2 नवंबर 2026, सुबह 4:30 IST से 3 नवंबर 2026, रात 3:46 IST तक रहेगा।
आश्लेषा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
विंशोत्तरी पद्धति में आश्लेषा का स्वामी बुध है, इसलिए आश्लेषा नक्षत्र में चंद्रमा के साथ जन्मे व्यक्ति का जीवन बुध की दशा से शुरू होता है। नीचे गण, योनि और नाड़ी वही हैं जो कुंडली मिलान में लिए जाते हैं।
| क्रम | 9 / 27 |
| विस्तार | 16°40′ कर्क – 30°00′ कर्क (106°40′–120°00′) |
| राशि | कर्क |
| विंशोत्तरी स्वामी | बुध (17 वर्ष की दशा) |
| देवता | सर्प (नाग) |
| गण | राक्षस |
| योनि | मार्जार (बिल्ली) |
| नाड़ी | अन्त्य |
आश्लेषा नक्षत्र के चरण और नाम अक्षर क्या हैं?
हर चरण 3°20′ का है। परंपरा से किसी चरण में जन्मे बच्चे का नाम उस चरण के अक्षर से रखा जाता है।
चंद्रमा अगली बार आश्लेषा नक्षत्र में कब है?
पंचांग में दिन का नक्षत्र वही होता है जिसमें चंद्रमा हो। ये आश्लेषा में चंद्रमा के अगले गोचर हैं।
| चंद्रमा का प्रवेश | चंद्रमा का निकास | अवधि |
|---|---|---|
| 23 घंटे 15 मिनट | ||
| 22 घंटे 42 मिनट | ||
| 22 घंटे 42 मिनट |
अन्य नक्षत्र
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- आश्लेषा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
- बुध (17 वर्ष की विंशोत्तरी दशा)।
- आश्लेषा नक्षत्र किस राशि में है?
- आश्लेषा कर्क में है: 16°40′ कर्क – 30°00′ कर्क।
- आश्लेषा नक्षत्र का गण क्या है?
- राक्षस; योनि मार्जार (बिल्ली); नाड़ी अन्त्य।
- आश्लेषा नक्षत्र के नाम अक्षर कौन से हैं?
- चरण 1 से 4: डी, डू, डे, डो।
- आश्लेषा नक्षत्र के देवता कौन हैं?
- सर्प (नाग), तैत्तिरीय ब्राह्मण के अनुसार।
- आश्लेषा नक्षत्र अगली बार कब है?
- चंद्रमा अगली बार आश्लेषा नक्षत्र में 2 नवंबर 2026, सुबह 4:30 IST से 3 नवंबर 2026, रात 3:46 IST तक रहेगा।
स्थिति: निरयण राशिचक्र, लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, डेटा फ़ाइलों सहित स्विस एफ़ेमेरिस। समय भारतीय मानक समय (IST, UTC+05:30) में, जिस क्षण चंद्रमा या सूर्य सीमा पार करता है, मिनट तक (सेकंड छोड़कर)। यह क्षण हर जगह एक ही है, केवल घड़ी का समय बदलता है। स्वामी: विंशोत्तरी दशा क्रम (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 46)। देवता: तैत्तिरीय ब्राह्मण 3.1। गण, योनि, नाड़ी: हमारे कुंडली मिलान की अष्टकूट तालिकाएँ। नाम अक्षर: अवकहड़ा चक्र। गणना पद्धति