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उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र: स्वामी शनि, देवता, चरण, नाम अक्षर और चंद्रमा की तारीख़ें
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र क्या है?
उत्तरा भाद्रपद 27 नक्षत्रों में 26वाँ नक्षत्र है, 3°20′ मीन – 16°40′ मीन तक (निरयण 333°20′–346°40′)। इसका विंशोत्तरी स्वामी शनि है और देवता अहिर्बुध्न्य।
चंद्रमा अगली बार उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में 20 नवंबर 2026, सुबह 6:56 IST से 21 नवंबर 2026, सुबह 6:50 IST तक रहेगा।
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र का स्वामी कौन है?
विंशोत्तरी पद्धति में उत्तरा भाद्रपद का स्वामी शनि है, इसलिए उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में चंद्रमा के साथ जन्मे व्यक्ति का जीवन शनि की दशा से शुरू होता है। नीचे गण, योनि और नाड़ी वही हैं जो कुंडली मिलान में लिए जाते हैं।
| क्रम | 26 / 27 |
| विस्तार | 3°20′ मीन – 16°40′ मीन (333°20′–346°40′) |
| राशि | मीन |
| विंशोत्तरी स्वामी | शनि (19 वर्ष की दशा) |
| देवता | अहिर्बुध्न्य |
| गण | मनुष्य |
| योनि | गौ (गाय) |
| नाड़ी | मध्य |
उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के चरण और नाम अक्षर क्या हैं?
हर चरण 3°20′ का है। परंपरा से किसी चरण में जन्मे बच्चे का नाम उस चरण के अक्षर से रखा जाता है।
चंद्रमा अगली बार उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में कब है?
पंचांग में दिन का नक्षत्र वही होता है जिसमें चंद्रमा हो। ये उत्तरा भाद्रपद में चंद्रमा के अगले गोचर हैं।
| चंद्रमा का प्रवेश | चंद्रमा का निकास | अवधि |
|---|---|---|
| 23 घंटे 54 मिनट | ||
| 24 घंटे 39 मिनट | ||
| 25 घंटे 14 मिनट |
अन्य नक्षत्र
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र का स्वामी कौन है?
- शनि (19 वर्ष की विंशोत्तरी दशा)।
- उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र किस राशि में है?
- उत्तरा भाद्रपद मीन में है: 3°20′ मीन – 16°40′ मीन।
- उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र का गण क्या है?
- मनुष्य; योनि गौ (गाय); नाड़ी मध्य।
- उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के नाम अक्षर कौन से हैं?
- चरण 1 से 4: दू, थ, झ, ञ।
- उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र के देवता कौन हैं?
- अहिर्बुध्न्य, तैत्तिरीय ब्राह्मण के अनुसार।
- उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र अगली बार कब है?
- चंद्रमा अगली बार उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में 20 नवंबर 2026, सुबह 6:56 IST से 21 नवंबर 2026, सुबह 6:50 IST तक रहेगा।
स्थिति: निरयण राशिचक्र, लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, डेटा फ़ाइलों सहित स्विस एफ़ेमेरिस। समय भारतीय मानक समय (IST, UTC+05:30) में, जिस क्षण चंद्रमा या सूर्य सीमा पार करता है, मिनट तक (सेकंड छोड़कर)। यह क्षण हर जगह एक ही है, केवल घड़ी का समय बदलता है। स्वामी: विंशोत्तरी दशा क्रम (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 46)। देवता: तैत्तिरीय ब्राह्मण 3.1। गण, योनि, नाड़ी: हमारे कुंडली मिलान की अष्टकूट तालिकाएँ। नाम अक्षर: अवकहड़ा चक्र। गणना पद्धति