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अंतिम अपडेट · स्विस एफ़ेमेरिस, लाहिड़ी अयनांश

स्वाती नक्षत्र: स्वामी राहु, देवता, चरण, नाम अक्षर और चंद्रमा की तारीख़ें

स्वाती नक्षत्र क्या है?

स्वाती 27 नक्षत्रों में 15वाँ नक्षत्र है, 6°40′ तुला – 20°00′ तुला तक (निरयण 186°40′–200°00′)। इसका विंशोत्तरी स्वामी राहु है और देवता वायु।

चंद्रमा अगली बार स्वाती नक्षत्र में 8 नवंबर 2026, सुबह 5:52 IST से 9 नवंबर 2026, सुबह 7:24 IST तक रहेगा।

स्वाती नक्षत्र का स्वामी कौन है?

विंशोत्तरी पद्धति में स्वाती का स्वामी राहु है, इसलिए स्वाती नक्षत्र में चंद्रमा के साथ जन्मे व्यक्ति का जीवन राहु की दशा से शुरू होता है। नीचे गण, योनि और नाड़ी वही हैं जो कुंडली मिलान में लिए जाते हैं।

क्रम15 / 27
विस्तार6°40′ तुला – 20°00′ तुला (186°40′–200°00′)
राशितुला
विंशोत्तरी स्वामीराहु (18 वर्ष की दशा)
देवतावायु
गणदेव
योनिमहिष (भैंस)
नाड़ीअन्त्य

स्वाती नक्षत्र के चरण और नाम अक्षर क्या हैं?

हर चरण 3°20′ का है। परंपरा से किसी चरण में जन्मे बच्चे का नाम उस चरण के अक्षर से रखा जाता है।

चरणविस्तारराशिनाम अक्षर
16°40′ तुला – 10°00′ तुलातुलारू
210°00′ तुला – 13°20′ तुलातुलारे
313°20′ तुला – 16°40′ तुलातुलारो
416°40′ तुला – 20°00′ तुलातुलाता

नक्षत्र से बच्चों के नाम

चंद्रमा अगली बार स्वाती नक्षत्र में कब है?

पंचांग में दिन का नक्षत्र वही होता है जिसमें चंद्रमा हो। ये स्वाती में चंद्रमा के अगले गोचर हैं।

चंद्रमा का प्रवेशचंद्रमा का निकासअवधि
25 घंटे 31 मिनट
25 घंटे 49 मिनट
25 घंटे 50 मिनट

शहर के अनुसार आज का पंचांग

अन्य नक्षत्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

स्वाती नक्षत्र का स्वामी कौन है?
राहु (18 वर्ष की विंशोत्तरी दशा)।
स्वाती नक्षत्र किस राशि में है?
स्वाती तुला में है: 6°40′ तुला – 20°00′ तुला।
स्वाती नक्षत्र का गण क्या है?
देव; योनि महिष (भैंस); नाड़ी अन्त्य।
स्वाती नक्षत्र के नाम अक्षर कौन से हैं?
चरण 1 से 4: रू, रे, रो, ता।
स्वाती नक्षत्र के देवता कौन हैं?
वायु, तैत्तिरीय ब्राह्मण के अनुसार।
स्वाती नक्षत्र अगली बार कब है?
चंद्रमा अगली बार स्वाती नक्षत्र में 8 नवंबर 2026, सुबह 5:52 IST से 9 नवंबर 2026, सुबह 7:24 IST तक रहेगा।

स्थिति: निरयण राशिचक्र, लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, डेटा फ़ाइलों सहित स्विस एफ़ेमेरिस। समय भारतीय मानक समय (IST, UTC+05:30) में, जिस क्षण चंद्रमा या सूर्य सीमा पार करता है, मिनट तक (सेकंड छोड़कर)। यह क्षण हर जगह एक ही है, केवल घड़ी का समय बदलता है। स्वामी: विंशोत्तरी दशा क्रम (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 46)। देवता: तैत्तिरीय ब्राह्मण 3.1। गण, योनि, नाड़ी: हमारे कुंडली मिलान की अष्टकूट तालिकाएँ। नाम अक्षर: अवकहड़ा चक्र। गणना पद्धति