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अंतिम अपडेट · स्विस एफ़ेमेरिस, लाहिड़ी अयनांश

पुष्य नक्षत्र: स्वामी शनि, देवता, चरण, नाम अक्षर और चंद्रमा की तारीख़ें

पुष्य नक्षत्र क्या है?

पुष्य 27 नक्षत्रों में 8वाँ नक्षत्र है, 3°20′ कर्क – 16°40′ कर्क तक (निरयण 93°20′–106°40′)। इसका विंशोत्तरी स्वामी शनि है और देवता बृहस्पति।

चंद्रमा अभी पुष्य नक्षत्र में है, 2 नवंबर 2026, सुबह 4:30 IST तक।

पुष्य नक्षत्र का स्वामी कौन है?

विंशोत्तरी पद्धति में पुष्य का स्वामी शनि है, इसलिए पुष्य नक्षत्र में चंद्रमा के साथ जन्मे व्यक्ति का जीवन शनि की दशा से शुरू होता है। नीचे गण, योनि और नाड़ी वही हैं जो कुंडली मिलान में लिए जाते हैं।

क्रम8 / 27
विस्तार3°20′ कर्क – 16°40′ कर्क (93°20′–106°40′)
राशिकर्क
विंशोत्तरी स्वामीशनि (19 वर्ष की दशा)
देवताबृहस्पति
गणदेव
योनिबकरा (मेढ़े की ही योनि)
नाड़ीमध्य

पुष्य नक्षत्र के चरण और नाम अक्षर क्या हैं?

हर चरण 3°20′ का है। परंपरा से किसी चरण में जन्मे बच्चे का नाम उस चरण के अक्षर से रखा जाता है।

चरणविस्तारराशिनाम अक्षर
13°20′ कर्क – 6°40′ कर्ककर्कहु
26°40′ कर्क – 10°00′ कर्ककर्कहे
310°00′ कर्क – 13°20′ कर्ककर्कहो
413°20′ कर्क – 16°40′ कर्ककर्कडा

नक्षत्र से बच्चों के नाम

चंद्रमा अगली बार पुष्य नक्षत्र में कब है?

पंचांग में दिन का नक्षत्र वही होता है जिसमें चंद्रमा हो। ये पुष्य में चंद्रमा के अगले गोचर हैं।

चंद्रमा का प्रवेशचंद्रमा का निकासअवधि
22 घंटे 50 मिनट
22 घंटे 9 मिनट
21 घंटे 22 मिनट

शहर के अनुसार आज का पंचांग

अन्य नक्षत्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुष्य नक्षत्र का स्वामी कौन है?
शनि (19 वर्ष की विंशोत्तरी दशा)।
पुष्य नक्षत्र किस राशि में है?
पुष्य कर्क में है: 3°20′ कर्क – 16°40′ कर्क।
पुष्य नक्षत्र का गण क्या है?
देव; योनि बकरा (मेढ़े की ही योनि); नाड़ी मध्य।
पुष्य नक्षत्र के नाम अक्षर कौन से हैं?
चरण 1 से 4: हु, हे, हो, डा।
पुष्य नक्षत्र के देवता कौन हैं?
बृहस्पति, तैत्तिरीय ब्राह्मण के अनुसार।
पुष्य नक्षत्र अगली बार कब है?
चंद्रमा अभी पुष्य नक्षत्र में है, 2 नवंबर 2026, सुबह 4:30 IST तक।

स्थिति: निरयण राशिचक्र, लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, डेटा फ़ाइलों सहित स्विस एफ़ेमेरिस। समय भारतीय मानक समय (IST, UTC+05:30) में, जिस क्षण चंद्रमा या सूर्य सीमा पार करता है, मिनट तक (सेकंड छोड़कर)। यह क्षण हर जगह एक ही है, केवल घड़ी का समय बदलता है। स्वामी: विंशोत्तरी दशा क्रम (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 46)। देवता: तैत्तिरीय ब्राह्मण 3.1। गण, योनि, नाड़ी: हमारे कुंडली मिलान की अष्टकूट तालिकाएँ। नाम अक्षर: अवकहड़ा चक्र। गणना पद्धति