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पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र: स्वामी शुक्र, देवता, चरण, नाम अक्षर और चंद्रमा की तारीख़ें
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र क्या है?
पूर्वाषाढ़ा 27 नक्षत्रों में 20वाँ नक्षत्र है, 13°20′ धनु – 26°40′ धनु तक (निरयण 253°20′–266°40′)। इसका विंशोत्तरी स्वामी शुक्र है और देवता आपः (जल)।
चंद्रमा अगली बार पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में 13 नवंबर 2026, शाम 5:17 IST से 14 नवंबर 2026, रात 8:24 IST तक रहेगा।
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
विंशोत्तरी पद्धति में पूर्वाषाढ़ा का स्वामी शुक्र है, इसलिए पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में चंद्रमा के साथ जन्मे व्यक्ति का जीवन शुक्र की दशा से शुरू होता है। नीचे गण, योनि और नाड़ी वही हैं जो कुंडली मिलान में लिए जाते हैं।
| क्रम | 20 / 27 |
| विस्तार | 13°20′ धनु – 26°40′ धनु (253°20′–266°40′) |
| राशि | धनु |
| विंशोत्तरी स्वामी | शुक्र (20 वर्ष की दशा) |
| देवता | आपः (जल) |
| गण | मनुष्य |
| योनि | वानर (बंदर) |
| नाड़ी | मध्य |
पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के चरण और नाम अक्षर क्या हैं?
हर चरण 3°20′ का है। परंपरा से किसी चरण में जन्मे बच्चे का नाम उस चरण के अक्षर से रखा जाता है।
चंद्रमा अगली बार पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में कब है?
पंचांग में दिन का नक्षत्र वही होता है जिसमें चंद्रमा हो। ये पूर्वाषाढ़ा में चंद्रमा के अगले गोचर हैं।
| चंद्रमा का प्रवेश | चंद्रमा का निकास | अवधि |
|---|---|---|
| 27 घंटे 7 मिनट | ||
| 27 घंटे 6 मिनट | ||
| 27 घंटे 4 मिनट |
अन्य नक्षत्र
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
- शुक्र (20 वर्ष की विंशोत्तरी दशा)।
- पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र किस राशि में है?
- पूर्वाषाढ़ा धनु में है: 13°20′ धनु – 26°40′ धनु।
- पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का गण क्या है?
- मनुष्य; योनि वानर (बंदर); नाड़ी मध्य।
- पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के नाम अक्षर कौन से हैं?
- चरण 1 से 4: भू, धा, फा, ढा।
- पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के देवता कौन हैं?
- आपः (जल), तैत्तिरीय ब्राह्मण के अनुसार।
- पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र अगली बार कब है?
- चंद्रमा अगली बार पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में 13 नवंबर 2026, शाम 5:17 IST से 14 नवंबर 2026, रात 8:24 IST तक रहेगा।
स्थिति: निरयण राशिचक्र, लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, डेटा फ़ाइलों सहित स्विस एफ़ेमेरिस। समय भारतीय मानक समय (IST, UTC+05:30) में, जिस क्षण चंद्रमा या सूर्य सीमा पार करता है, मिनट तक (सेकंड छोड़कर)। यह क्षण हर जगह एक ही है, केवल घड़ी का समय बदलता है। स्वामी: विंशोत्तरी दशा क्रम (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 46)। देवता: तैत्तिरीय ब्राह्मण 3.1। गण, योनि, नाड़ी: हमारे कुंडली मिलान की अष्टकूट तालिकाएँ। नाम अक्षर: अवकहड़ा चक्र। गणना पद्धति