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अंतिम अपडेट · स्विस एफ़ेमेरिस, लाहिड़ी अयनांश

श्रवण नक्षत्र: स्वामी चंद्र, देवता, चरण, नाम अक्षर और चंद्रमा की तारीख़ें

श्रवण नक्षत्र क्या है?

श्रवण 27 नक्षत्रों में 22वाँ नक्षत्र है, 10°00′ मकर – 23°20′ मकर तक (निरयण 280°00′–293°20′)। इसका विंशोत्तरी स्वामी चंद्र है और देवता विष्णु।

चंद्रमा अगली बार श्रवण नक्षत्र में 15 नवंबर 2026, रात 11:29 IST से 17 नवंबर 2026, रात 2:17 IST तक रहेगा।

श्रवण नक्षत्र का स्वामी कौन है?

विंशोत्तरी पद्धति में श्रवण का स्वामी चंद्र है, इसलिए श्रवण नक्षत्र में चंद्रमा के साथ जन्मे व्यक्ति का जीवन चंद्र की दशा से शुरू होता है। नीचे गण, योनि और नाड़ी वही हैं जो कुंडली मिलान में लिए जाते हैं।

क्रम22 / 27
विस्तार10°00′ मकर – 23°20′ मकर (280°00′–293°20′)
राशिमकर
विंशोत्तरी स्वामीचंद्र (10 वर्ष की दशा)
देवताविष्णु
गणदेव
योनिवानर (बंदर)
नाड़ीअन्त्य

श्रवण नक्षत्र के चरण और नाम अक्षर क्या हैं?

हर चरण 3°20′ का है। परंपरा से किसी चरण में जन्मे बच्चे का नाम उस चरण के अक्षर से रखा जाता है।

चरणविस्तारराशिनाम अक्षर
110°00′ मकर – 13°20′ मकरमकरखी
213°20′ मकर – 16°40′ मकरमकरखू
316°40′ मकर – 20°00′ मकरमकरखे
420°00′ मकर – 23°20′ मकरमकरखो

नक्षत्र से बच्चों के नाम

चंद्रमा अगली बार श्रवण नक्षत्र में कब है?

पंचांग में दिन का नक्षत्र वही होता है जिसमें चंद्रमा हो। ये श्रवण में चंद्रमा के अगले गोचर हैं।

चंद्रमा का प्रवेशचंद्रमा का निकासअवधि
26 घंटे 48 मिनट
27 घंटे 0 मिनट
26 घंटे 55 मिनट

शहर के अनुसार आज का पंचांग

अन्य नक्षत्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रवण नक्षत्र का स्वामी कौन है?
चंद्र (10 वर्ष की विंशोत्तरी दशा)।
श्रवण नक्षत्र किस राशि में है?
श्रवण मकर में है: 10°00′ मकर – 23°20′ मकर।
श्रवण नक्षत्र का गण क्या है?
देव; योनि वानर (बंदर); नाड़ी अन्त्य।
श्रवण नक्षत्र के नाम अक्षर कौन से हैं?
चरण 1 से 4: खी, खू, खे, खो।
श्रवण नक्षत्र के देवता कौन हैं?
विष्णु, तैत्तिरीय ब्राह्मण के अनुसार।
श्रवण नक्षत्र अगली बार कब है?
चंद्रमा अगली बार श्रवण नक्षत्र में 15 नवंबर 2026, रात 11:29 IST से 17 नवंबर 2026, रात 2:17 IST तक रहेगा।

स्थिति: निरयण राशिचक्र, लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, डेटा फ़ाइलों सहित स्विस एफ़ेमेरिस। समय भारतीय मानक समय (IST, UTC+05:30) में, जिस क्षण चंद्रमा या सूर्य सीमा पार करता है, मिनट तक (सेकंड छोड़कर)। यह क्षण हर जगह एक ही है, केवल घड़ी का समय बदलता है। स्वामी: विंशोत्तरी दशा क्रम (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 46)। देवता: तैत्तिरीय ब्राह्मण 3.1। गण, योनि, नाड़ी: हमारे कुंडली मिलान की अष्टकूट तालिकाएँ। नाम अक्षर: अवकहड़ा चक्र। गणना पद्धति