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अंतिम अपडेट · स्विस एफ़ेमेरिस, लाहिड़ी अयनांश

रेवती नक्षत्र: स्वामी बुध, देवता, चरण, नाम अक्षर और चंद्रमा की तारीख़ें

रेवती नक्षत्र क्या है?

रेवती 27 नक्षत्रों में 27वाँ नक्षत्र है, 16°40′ मीन – 30°00′ मीन तक (निरयण 346°40′–360°00′)। इसका विंशोत्तरी स्वामी बुध है और देवता पूषा।

चंद्रमा अगली बार रेवती नक्षत्र में 21 नवंबर 2026, सुबह 6:50 IST से 22 नवंबर 2026, सुबह 5:55 IST तक रहेगा।

रेवती नक्षत्र का स्वामी कौन है?

विंशोत्तरी पद्धति में रेवती का स्वामी बुध है, इसलिए रेवती नक्षत्र में चंद्रमा के साथ जन्मे व्यक्ति का जीवन बुध की दशा से शुरू होता है। नीचे गण, योनि और नाड़ी वही हैं जो कुंडली मिलान में लिए जाते हैं।

क्रम27 / 27
विस्तार16°40′ मीन – 30°00′ मीन (346°40′–360°00′)
राशिमीन
विंशोत्तरी स्वामीबुध (17 वर्ष की दशा)
देवतापूषा
गणदेव
योनिगज (हाथी)
नाड़ीअन्त्य

रेवती नक्षत्र के चरण और नाम अक्षर क्या हैं?

हर चरण 3°20′ का है। परंपरा से किसी चरण में जन्मे बच्चे का नाम उस चरण के अक्षर से रखा जाता है।

चरणविस्तारराशिनाम अक्षर
116°40′ मीन – 20°00′ मीनमीनदे
220°00′ मीन – 23°20′ मीनमीनदो
323°20′ मीन – 26°40′ मीनमीनचा
426°40′ मीन – 30°00′ मीनमीनची

नक्षत्र से बच्चों के नाम

चंद्रमा अगली बार रेवती नक्षत्र में कब है?

पंचांग में दिन का नक्षत्र वही होता है जिसमें चंद्रमा हो। ये रेवती में चंद्रमा के अगले गोचर हैं।

चंद्रमा का प्रवेशचंद्रमा का निकासअवधि
23 घंटे 4 मिनट
23 घंटे 47 मिनट
24 घंटे 32 मिनट

शहर के अनुसार आज का पंचांग

अन्य नक्षत्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रेवती नक्षत्र का स्वामी कौन है?
बुध (17 वर्ष की विंशोत्तरी दशा)।
रेवती नक्षत्र किस राशि में है?
रेवती मीन में है: 16°40′ मीन – 30°00′ मीन।
रेवती नक्षत्र का गण क्या है?
देव; योनि गज (हाथी); नाड़ी अन्त्य।
रेवती नक्षत्र के नाम अक्षर कौन से हैं?
चरण 1 से 4: दे, दो, चा, ची।
रेवती नक्षत्र के देवता कौन हैं?
पूषा, तैत्तिरीय ब्राह्मण के अनुसार।
रेवती नक्षत्र अगली बार कब है?
चंद्रमा अगली बार रेवती नक्षत्र में 21 नवंबर 2026, सुबह 6:50 IST से 22 नवंबर 2026, सुबह 5:55 IST तक रहेगा।

स्थिति: निरयण राशिचक्र, लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, डेटा फ़ाइलों सहित स्विस एफ़ेमेरिस। समय भारतीय मानक समय (IST, UTC+05:30) में, जिस क्षण चंद्रमा या सूर्य सीमा पार करता है, मिनट तक (सेकंड छोड़कर)। यह क्षण हर जगह एक ही है, केवल घड़ी का समय बदलता है। स्वामी: विंशोत्तरी दशा क्रम (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 46)। देवता: तैत्तिरीय ब्राह्मण 3.1। गण, योनि, नाड़ी: हमारे कुंडली मिलान की अष्टकूट तालिकाएँ। नाम अक्षर: अवकहड़ा चक्र। गणना पद्धति