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अंतिम अपडेट · स्विस एफ़ेमेरिस, लाहिड़ी अयनांश

रोहिणी नक्षत्र: स्वामी चंद्र, देवता, चरण, नाम अक्षर और चंद्रमा की तारीख़ें

रोहिणी नक्षत्र क्या है?

रोहिणी 27 नक्षत्रों में चौथा नक्षत्र है, 10°00′ वृषभ – 23°20′ वृषभ तक (निरयण 40°00′–53°20′)। इसका विंशोत्तरी स्वामी चंद्र है और देवता प्रजापति (ब्रह्मा)।

चंद्रमा अगली बार रोहिणी नक्षत्र में 24 नवंबर 2026, रात 11:25 IST से 25 नवंबर 2026, रात 8:36 IST तक रहेगा।

रोहिणी नक्षत्र का स्वामी कौन है?

विंशोत्तरी पद्धति में रोहिणी का स्वामी चंद्र है, इसलिए रोहिणी नक्षत्र में चंद्रमा के साथ जन्मे व्यक्ति का जीवन चंद्र की दशा से शुरू होता है। नीचे गण, योनि और नाड़ी वही हैं जो कुंडली मिलान में लिए जाते हैं।

क्रम4 / 27
विस्तार10°00′ वृषभ – 23°20′ वृषभ (40°00′–53°20′)
राशिवृषभ
विंशोत्तरी स्वामीचंद्र (10 वर्ष की दशा)
देवताप्रजापति (ब्रह्मा)
गणमनुष्य
योनिसर्प
नाड़ीअन्त्य

रोहिणी नक्षत्र के चरण और नाम अक्षर क्या हैं?

हर चरण 3°20′ का है। परंपरा से किसी चरण में जन्मे बच्चे का नाम उस चरण के अक्षर से रखा जाता है।

चरणविस्तारराशिनाम अक्षर
110°00′ वृषभ – 13°20′ वृषभवृषभओ
213°20′ वृषभ – 16°40′ वृषभवृषभवा
316°40′ वृषभ – 20°00′ वृषभवृषभवी
420°00′ वृषभ – 23°20′ वृषभवृषभवू

नक्षत्र से बच्चों के नाम

चंद्रमा अगली बार रोहिणी नक्षत्र में कब है?

पंचांग में दिन का नक्षत्र वही होता है जिसमें चंद्रमा हो। ये रोहिणी में चंद्रमा के अगले गोचर हैं।

चंद्रमा का प्रवेशचंद्रमा का निकासअवधि
21 घंटे 11 मिनट
21 घंटे 10 मिनट
21 घंटे 48 मिनट

शहर के अनुसार आज का पंचांग

अन्य नक्षत्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रोहिणी नक्षत्र का स्वामी कौन है?
चंद्र (10 वर्ष की विंशोत्तरी दशा)।
रोहिणी नक्षत्र किस राशि में है?
रोहिणी वृषभ में है: 10°00′ वृषभ – 23°20′ वृषभ।
रोहिणी नक्षत्र का गण क्या है?
मनुष्य; योनि सर्प; नाड़ी अन्त्य।
रोहिणी नक्षत्र के नाम अक्षर कौन से हैं?
चरण 1 से 4: ओ, वा, वी, वू।
रोहिणी नक्षत्र के देवता कौन हैं?
प्रजापति (ब्रह्मा), तैत्तिरीय ब्राह्मण के अनुसार।
रोहिणी नक्षत्र अगली बार कब है?
चंद्रमा अगली बार रोहिणी नक्षत्र में 24 नवंबर 2026, रात 11:25 IST से 25 नवंबर 2026, रात 8:36 IST तक रहेगा।

स्थिति: निरयण राशिचक्र, लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, डेटा फ़ाइलों सहित स्विस एफ़ेमेरिस। समय भारतीय मानक समय (IST, UTC+05:30) में, जिस क्षण चंद्रमा या सूर्य सीमा पार करता है, मिनट तक (सेकंड छोड़कर)। यह क्षण हर जगह एक ही है, केवल घड़ी का समय बदलता है। स्वामी: विंशोत्तरी दशा क्रम (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 46)। देवता: तैत्तिरीय ब्राह्मण 3.1। गण, योनि, नाड़ी: हमारे कुंडली मिलान की अष्टकूट तालिकाएँ। नाम अक्षर: अवकहड़ा चक्र। गणना पद्धति