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अंतिम अपडेट · स्विस एफ़ेमेरिस, लाहिड़ी अयनांश

कृत्तिका नक्षत्र: स्वामी सूर्य, देवता, चरण, नाम अक्षर और चंद्रमा की तारीख़ें

कृत्तिका नक्षत्र क्या है?

कृत्तिका 27 नक्षत्रों में तीसरा नक्षत्र है, 26°40′ मेष – 10°00′ वृषभ तक (निरयण 26°40′–40°00′)। इसका विंशोत्तरी स्वामी सूर्य है और देवता अग्नि।

चंद्रमा अगली बार कृत्तिका नक्षत्र में 24 नवंबर 2026, रात 2:02 IST से 24 नवंबर 2026, रात 11:25 IST तक रहेगा।

कृत्तिका नक्षत्र का स्वामी कौन है?

विंशोत्तरी पद्धति में कृत्तिका का स्वामी सूर्य है, इसलिए कृत्तिका नक्षत्र में चंद्रमा के साथ जन्मे व्यक्ति का जीवन सूर्य की दशा से शुरू होता है। नीचे गण, योनि और नाड़ी वही हैं जो कुंडली मिलान में लिए जाते हैं।

क्रम3 / 27
विस्तार26°40′ मेष – 10°00′ वृषभ (26°40′–40°00′)
राशिमेष, वृषभ
विंशोत्तरी स्वामीसूर्य (6 वर्ष की दशा)
देवताअग्नि
गणराक्षस
योनिमेढ़ा
नाड़ीअन्त्य

कृत्तिका नक्षत्र के चरण और नाम अक्षर क्या हैं?

हर चरण 3°20′ का है। परंपरा से किसी चरण में जन्मे बच्चे का नाम उस चरण के अक्षर से रखा जाता है।

चरणविस्तारराशिनाम अक्षर
126°40′ मेष – 30°00′ मेषमेषअ
20°00′ वृषभ – 3°20′ वृषभवृषभई
33°20′ वृषभ – 6°40′ वृषभवृषभउ
46°40′ वृषभ – 10°00′ वृषभवृषभए

नक्षत्र से बच्चों के नाम

चंद्रमा अगली बार कृत्तिका नक्षत्र में कब है?

पंचांग में दिन का नक्षत्र वही होता है जिसमें चंद्रमा हो। ये कृत्तिका में चंद्रमा के अगले गोचर हैं।

चंद्रमा का प्रवेशचंद्रमा का निकासअवधि
21 घंटे 22 मिनट
21 घंटे 36 मिनट
22 घंटे 23 मिनट

शहर के अनुसार आज का पंचांग

अन्य नक्षत्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कृत्तिका नक्षत्र का स्वामी कौन है?
सूर्य (6 वर्ष की विंशोत्तरी दशा)।
कृत्तिका नक्षत्र किस राशि में है?
कृत्तिका मेष और वृषभ में है: 26°40′ मेष – 10°00′ वृषभ।
कृत्तिका नक्षत्र का गण क्या है?
राक्षस; योनि मेढ़ा; नाड़ी अन्त्य।
कृत्तिका नक्षत्र के नाम अक्षर कौन से हैं?
चरण 1 से 4: अ, ई, उ, ए।
कृत्तिका नक्षत्र के देवता कौन हैं?
अग्नि, तैत्तिरीय ब्राह्मण के अनुसार।
कृत्तिका नक्षत्र अगली बार कब है?
चंद्रमा अगली बार कृत्तिका नक्षत्र में 24 नवंबर 2026, रात 2:02 IST से 24 नवंबर 2026, रात 11:25 IST तक रहेगा।

स्थिति: निरयण राशिचक्र, लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, डेटा फ़ाइलों सहित स्विस एफ़ेमेरिस। समय भारतीय मानक समय (IST, UTC+05:30) में, जिस क्षण चंद्रमा या सूर्य सीमा पार करता है, मिनट तक (सेकंड छोड़कर)। यह क्षण हर जगह एक ही है, केवल घड़ी का समय बदलता है। स्वामी: विंशोत्तरी दशा क्रम (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 46)। देवता: तैत्तिरीय ब्राह्मण 3.1। गण, योनि, नाड़ी: हमारे कुंडली मिलान की अष्टकूट तालिकाएँ। नाम अक्षर: अवकहड़ा चक्र। गणना पद्धति