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अंतिम अपडेट · स्विस एफ़ेमेरिस, लाहिड़ी अयनांश

धनिष्ठा नक्षत्र: स्वामी मंगल, देवता, चरण, नाम अक्षर और चंद्रमा की तारीख़ें

धनिष्ठा नक्षत्र क्या है?

धनिष्ठा 27 नक्षत्रों में 23वाँ नक्षत्र है, 23°20′ मकर – 6°40′ कुंभ तक (निरयण 293°20′–306°40′)। इसका विंशोत्तरी स्वामी मंगल है और देवता वसु।

चंद्रमा अगली बार धनिष्ठा नक्षत्र में 17 नवंबर 2026, रात 2:17 IST से 18 नवंबर 2026, सुबह 4:34 IST तक रहेगा।

धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी कौन है?

विंशोत्तरी पद्धति में धनिष्ठा का स्वामी मंगल है, इसलिए धनिष्ठा नक्षत्र में चंद्रमा के साथ जन्मे व्यक्ति का जीवन मंगल की दशा से शुरू होता है। नीचे गण, योनि और नाड़ी वही हैं जो कुंडली मिलान में लिए जाते हैं।

क्रम23 / 27
विस्तार23°20′ मकर – 6°40′ कुंभ (293°20′–306°40′)
राशिमकर, कुंभ
विंशोत्तरी स्वामीमंगल (7 वर्ष की दशा)
देवतावसु
गणराक्षस
योनिसिंह
नाड़ीमध्य

धनिष्ठा नक्षत्र के चरण और नाम अक्षर क्या हैं?

हर चरण 3°20′ का है। परंपरा से किसी चरण में जन्मे बच्चे का नाम उस चरण के अक्षर से रखा जाता है।

चरणविस्तारराशिनाम अक्षर
123°20′ मकर – 26°40′ मकरमकरगा
226°40′ मकर – 30°00′ मकरमकरगी
30°00′ कुंभ – 3°20′ कुंभकुंभगू
43°20′ कुंभ – 6°40′ कुंभकुंभगे

नक्षत्र से बच्चों के नाम

चंद्रमा अगली बार धनिष्ठा नक्षत्र में कब है?

पंचांग में दिन का नक्षत्र वही होता है जिसमें चंद्रमा हो। ये धनिष्ठा में चंद्रमा के अगले गोचर हैं।

चंद्रमा का प्रवेशचंद्रमा का निकासअवधि
26 घंटे 17 मिनट
26 घंटे 40 मिनट
26 घंटे 41 मिनट

शहर के अनुसार आज का पंचांग

अन्य नक्षत्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
मंगल (7 वर्ष की विंशोत्तरी दशा)।
धनिष्ठा नक्षत्र किस राशि में है?
धनिष्ठा मकर और कुंभ में है: 23°20′ मकर – 6°40′ कुंभ।
धनिष्ठा नक्षत्र का गण क्या है?
राक्षस; योनि सिंह; नाड़ी मध्य।
धनिष्ठा नक्षत्र के नाम अक्षर कौन से हैं?
चरण 1 से 4: गा, गी, गू, गे।
धनिष्ठा नक्षत्र के देवता कौन हैं?
वसु, तैत्तिरीय ब्राह्मण के अनुसार।
धनिष्ठा नक्षत्र अगली बार कब है?
चंद्रमा अगली बार धनिष्ठा नक्षत्र में 17 नवंबर 2026, रात 2:17 IST से 18 नवंबर 2026, सुबह 4:34 IST तक रहेगा।

स्थिति: निरयण राशिचक्र, लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, डेटा फ़ाइलों सहित स्विस एफ़ेमेरिस। समय भारतीय मानक समय (IST, UTC+05:30) में, जिस क्षण चंद्रमा या सूर्य सीमा पार करता है, मिनट तक (सेकंड छोड़कर)। यह क्षण हर जगह एक ही है, केवल घड़ी का समय बदलता है। स्वामी: विंशोत्तरी दशा क्रम (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 46)। देवता: तैत्तिरीय ब्राह्मण 3.1। गण, योनि, नाड़ी: हमारे कुंडली मिलान की अष्टकूट तालिकाएँ। नाम अक्षर: अवकहड़ा चक्र। गणना पद्धति