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अंतिम अपडेट · स्विस एफ़ेमेरिस, लाहिड़ी अयनांश

मघा नक्षत्र: स्वामी केतु, देवता, चरण, नाम अक्षर और चंद्रमा की तारीख़ें

मघा नक्षत्र क्या है?

मघा 27 नक्षत्रों में 10वाँ नक्षत्र है, 0°00′ सिंह – 13°20′ सिंह तक (निरयण 120°00′–133°20′)। इसका विंशोत्तरी स्वामी केतु है और देवता पितर।

चंद्रमा अगली बार मघा नक्षत्र में 3 नवंबर 2026, रात 3:46 IST से 4 नवंबर 2026, रात 3:26 IST तक रहेगा।

मघा नक्षत्र का स्वामी कौन है?

विंशोत्तरी पद्धति में मघा का स्वामी केतु है, इसलिए मघा नक्षत्र में चंद्रमा के साथ जन्मे व्यक्ति का जीवन केतु की दशा से शुरू होता है। नीचे गण, योनि और नाड़ी वही हैं जो कुंडली मिलान में लिए जाते हैं।

क्रम10 / 27
विस्तार0°00′ सिंह – 13°20′ सिंह (120°00′–133°20′)
राशिसिंह
विंशोत्तरी स्वामीकेतु (7 वर्ष की दशा)
देवतापितर
गणराक्षस
योनिमूषक (चूहा)
नाड़ीअन्त्य

मघा नक्षत्र के चरण और नाम अक्षर क्या हैं?

हर चरण 3°20′ का है। परंपरा से किसी चरण में जन्मे बच्चे का नाम उस चरण के अक्षर से रखा जाता है।

चरणविस्तारराशिनाम अक्षर
10°00′ सिंह – 3°20′ सिंहसिंहमा
23°20′ सिंह – 6°40′ सिंहसिंहमी
36°40′ सिंह – 10°00′ सिंहसिंहमू
410°00′ सिंह – 13°20′ सिंहसिंहमे

नक्षत्र से बच्चों के नाम

चंद्रमा अगली बार मघा नक्षत्र में कब है?

पंचांग में दिन का नक्षत्र वही होता है जिसमें चंद्रमा हो। ये मघा में चंद्रमा के अगले गोचर हैं।

चंद्रमा का प्रवेशचंद्रमा का निकासअवधि
23 घंटे 40 मिनट
23 घंटे 18 मिनट
22 घंटे 28 मिनट

शहर के अनुसार आज का पंचांग

अन्य नक्षत्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मघा नक्षत्र का स्वामी कौन है?
केतु (7 वर्ष की विंशोत्तरी दशा)।
मघा नक्षत्र किस राशि में है?
मघा सिंह में है: 0°00′ सिंह – 13°20′ सिंह।
मघा नक्षत्र का गण क्या है?
राक्षस; योनि मूषक (चूहा); नाड़ी अन्त्य।
मघा नक्षत्र के नाम अक्षर कौन से हैं?
चरण 1 से 4: मा, मी, मू, मे।
मघा नक्षत्र के देवता कौन हैं?
पितर, तैत्तिरीय ब्राह्मण के अनुसार।
मघा नक्षत्र अगली बार कब है?
चंद्रमा अगली बार मघा नक्षत्र में 3 नवंबर 2026, रात 3:46 IST से 4 नवंबर 2026, रात 3:26 IST तक रहेगा।

स्थिति: निरयण राशिचक्र, लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, डेटा फ़ाइलों सहित स्विस एफ़ेमेरिस। समय भारतीय मानक समय (IST, UTC+05:30) में, जिस क्षण चंद्रमा या सूर्य सीमा पार करता है, मिनट तक (सेकंड छोड़कर)। यह क्षण हर जगह एक ही है, केवल घड़ी का समय बदलता है। स्वामी: विंशोत्तरी दशा क्रम (बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय 46)। देवता: तैत्तिरीय ब्राह्मण 3.1। गण, योनि, नाड़ी: हमारे कुंडली मिलान की अष्टकूट तालिकाएँ। नाम अक्षर: अवकहड़ा चक्र। गणना पद्धति